तीन तलाक बिल के पास होने के बाद से नुस्लिम महिलाएँ आज़ादी की खुशी मना रहीं थीं। तो वहीं कुछ परिवारों में इस बात को लेकर डर हैं। हाल ही में पास हुए मुस्लिम विधेयक 2019 में तीन साल की सजा के प्रावधान को लेकर लोगों में डर है।

इसी के चलते मेरठ के दो मामले सामने आ रहे हैं। मामले तीन तलाक देने के ही हैं। पुलिस ने इस मामले में आरोपी पति पर मुस्लिम महिला विधेयक में लगी धारा संख्या 3 और 4 के तहत केस तो तय कर लिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि इस मामले में कितनी जल्द कारवाई की जाएगी।

पहला मुकदमा था बुशरा और मोहसिन का। साल 2016 में बागपत के चाँदीनगर के चमरावल गाँव के मोहसिन से बुशरा का निकाह हुआ। निकाह के एक साल के अंतराल में ही ससुरालवालों ने ही उस पर जुल्म ढाने शुरु कर दिए। बुशरा इन सभी चीजों को सह रही थी और इसी के दौरान वह एक बेटी की माँ भी बन गई। बुशरा ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि मोहसिन ने उसकी बेटी को एक नदी में फेंकने की कोशिश की थी। शुक्र है कि स्थानीय लोगों ने उस फूल सी बच्ची को बचा लिया।

दुसरा मुकदमा है नाज़रीन और सलमान का। नाजरीन ने अपनी सास, ससुर, देवर, ननद और ननदोई के खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी है। नाजरीन ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि उसके पति ने सऊदी अरब से फोन करके तीन तलाक कह दिया था।

यूँ तो सरकार द्वारा पास किए गए बिल से लोगों को यह उम्मीद तो है कि अब हालात सुधर जाएंगे। लेकिन सबके दिमाग में कुछ सवाल तो जिंदा हो ही गए हैं। अब देखना यह है कि इन अनगिनत सवालों पर जवाब सरकार कितनी जल्द देती है और सरकार द्वारा की गई कारवाई कितनी कारगर साबित होगी।

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