Anant Chaturdashi – अनंत चतुर्दर्शी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप के लिए व्रत भी रखा जाता है। इस दिन अनंत सूत्र धागा भी बाँधा जाता है। स्त्रियां दाएं और पुरुष बाए हाथ में इस पवित्र धागे को बांधती हैं। कहते हैं की इस धागे को बाँधने से सभी दुःख और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं। इसके साथ ही अनंत चतुर्दर्शी के दिन गणपति विसर्जन भी होता है। 10 दिन के बाद भक्तगण झूमते-गाते अपने प्यारे गणपति को विदा करते हैं। और अगले साल फिर से आने का बुलावा भी देते हैं।

अनंत चतुर्दर्शी के दिन अनंत सूत्र बाँधा जाता है। यह धागा रेशम या सूत का होता है। कहते हैं की इस सूत में 14 गांठे लगाईं जाती हैं। जिनमें सत्य, तप, जन, मह, स्वर्ग, भुवः, भू, अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल शामिल हैं। लोग कहते हैं कि भगवान विष्णु ने अपने द्वारा बनाये गए लोकों की रक्षा करने के लिए अलग-अलग 14 अवतार लिए हैं। इस दिन भक्तजन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हैं। इस पाठ के करने सुख और समृद्धि मिलती है।

Anant Chaturdashi को अनंत चौदस भी कहा जाता है। अनंत चतुर्दर्शी, हर साल भादो मास के शुक्ल पक्ष की 14वें दिन मनाई जाती है। इस साल अनंत चतुर्दर्शी 12 सितम्बर को पड़ती है। इस साल चतुर्दर्शी तिथि 12 सितम्बर के दिन सुबह 05:06 बजे से शुरू हो कर 13 सितम्बर की सुबह 07:35 बजे तक रहेगी। इस तिथि पर पूजा का शुभ मुहूर्त 12 सितंबर को सुबह 06:13 मिनट से 13 सितंबर की सबुह 07:17 मिनट तक रहेगा।

Anant Chaturdashi के दिन सुबह उठकर स्नान-आदि करके साफ़ कपडे पहन कर व्रत का संकल्प किया जाता है। पूजा में कलश स्थापित कर भगवान विष्णु की तस्वीर रखते हैं। इसके बाद अस्त दल व फूल और कुश चढ़ाते हैं। फिर सूत में कुमकुम या हल्दी में 14 गांठ वाले अनंत सूत्र को तैयार करें, और भगवान विष्णु के पास चढ़ा दें।

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