आखिरकार सोमवार को ‘चंद्रयान-2’ ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश भवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भर ली है। इस उड़ान को देखने के लिए हजारों लोग पहुँचे। इस मिशन को पहले 15 जुलाई को लाँच किया जाना था, लेकिन लाँच व्हीकल में आई कुछ खराबी के कारण इसे वक्त रहते टाल दिया गया था। माना जा रहा है कि इसरो ने जो बदलाव इस मिशन में किए हैं, उससे लाॅन्चिंग में होने वाली देरी से इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस यान में इसरो का बाहुबली कहे जाने वाला राॅकेट GSLV-MkOIII-M1 भी सवार है।

इस मिशन से भारत दुनिया का चौथा देश बनेगा, जिसका रोवर चाँद पर उतरेगा।

इसरो ने इस मिशन के लाॅन्च करने की तारीख भले ही बढ़ा दी हो, लेकिन यह अपनी तय तारीख 6-7 सितंबर को ही चंद्र ग्रह पर पहुँचेगा। तय तारीख में इसे इसके मुकाम तक एक यही कारण है कि लैंडर और रोवर अपना काम सही से कर सकेंगे।

लाॅन्चिंग में हुई देरी की वजह से अब यह यान सिर्फ 4 चक्कर लगाएगा। यह यान सूरज की तेज रोशनी की जगह लैंडिंग करेगा। सूरज की रोशनी 21 सितंबर के बाद कम होनी शुरु हो जाएगी। लैंडर और रोवर 15 दिन के लिए काम करेंगे, इसी कारण उन्हें तय समय पर पहुँचना जरुरी है।

‘चंद्रयान’ का वजन 3,877 किलो है, जो कि ‘चंद्रयान-1’ से करीब तीन गुना ज्यादा है। इस राॅकेट में तीन माॅड्यूल हैं – आर्बिटर, लैंडर और रोवर। इस मिशन में इसरो लैंडर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारेगा। रोवर लैंडर के अंदर मौजूद है जिसकी रफ्तार 1 सेंटी मीटर प्रति सेकंड बताई जा रही है। आर्बिटर चांद की कक्षा में पहुँचने के बाद एक साल तक काम करेगा। आर्बिटर का काम पृथ्वी और लैंडर के बीच संपर्क बनाना है। यह चाँद की सतह पर मैप तैयार करेगा जिससे उसके बारे में खोज कि जा सके। फिर, राॅकेट के मुख्य हिस्से बताए जाने वाले लैंडर और रोवर वहां अपना काम करना शुरु करेंगे। लैंडर का काम चाँद पर भूकंप के बारे में पता लगाना है। रोवर का काम चाँद पर खनिज चीजों की खोज करना है।

चंद्रयान2′ की सफल लाॅन्चिंग पर सारे देश में है उत्साह, इसरो को बधाई मिल रही है। इसरो के चैयरमैन के. सिवन ने चंद्रयान के सफल लाॅन्चिंग की बधाई टीम को दी।

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