हाल ही में दिल्ली के एक रविदास मंदिर को गिराए जाने पर देश के कई हिस्सों में दलित समुदाय के लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को दलित समुदाय के लोग हाथ में नीले रंग के झंडे लिए झंडेवालान से रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। दिल्ली विकास प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 अगस्त को मंदिर गिराया था। जिसके बाद लोगों का गुस्सा आग की तरह फैलने लगा। प्रदर्शकारियों ने इस बात का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से दोबारा मंदिर बनवाने की मांग रख दी।

देश महत्वपूर्ण राज्यों, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य जगहों पर प्रदर्शनकारी ‘जय भीम’ के नारे लगा रहे थे। दलित समुदाय अब सरकार से मांग कर रहा है कि संबंधित जमीन को वापस सौंपा जाए और मंदिर का जल्द निर्माण करवाया जाए।

और अब मामला राजनीति की ओर रूख लेने लगा है। कई राजनीतिक पार्टियों ने तुगलकाबाद में संबंधित स्थल पर या किसी और जगह मंदिर को बनवाने की मांग कर रही हैं।

पंजाब में 13 अगस्त को दलित समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में मौजूद थे – दिल्ली के सामाजिक न्याय मंत्री राजेंद्र पाल गौतम, भीम आर्मी प्रमुख चंद्र शेखर आज़ाद और दलित समुदाय के आध्यात्मिक नेता।

26 नवंबर तक वापस बनना चाहिए मंदिर, वरना होगा फिर से ‘प्रदर्शन’

प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है की यदि रविदास मंदिर को 26 नवम्बर तक वापस उसी जगह स्थापित नहीं किया तो देश भर में विरोध प्रदर्शन होगा। बुधवार को हुए विरोध प्रदर्शन में हिंसा भी देखी गई। प्रदर्शन करने से रोक रहे पुलिस बल ने प्रर्दशनकारियों पर आरोप लगाया कि वह हिंसा कर रहे थे, जिसपर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन प्रदर्शनकारी यह आरोप को गलत बताते हुए प्रशासन को ही हिंसा का जिम्मेदार बताया।

ख़बरों के मुताबिक़, दलित संगठन भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद को पुलिस ने हिरासत में लिया है और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज व गोली बारी भी करी। भीम सेना ने इसकी निंदा की और कहा कि उन्हें जल्दी रिहा किया जाए।

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