12 जुलाई को देवशयनी एकादशी अर्थात आषाढ़ शुक्ल एकादशी मनाई जाएगी। इसे पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए निंद्रा में चले जाएँगे। जिसके कारण चार महीने के लिए कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाएगा। इस दौरान सुर्य दक्षिणायन हो जाते हैं झ्ससे शादी, मुण्डन, जनेऊ, तिलक जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

कहा जाता है कि इस व्रत को करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और सभी मनेकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत के करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त होता है। ।इसके बाद भगवान विष्णु कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की तिथि को जागते हैं। इसी बीच भगवान श्री विष्णु भादों मास की शुक्ल एकादशी को करवट बदलते हैं।

डाक्टरों की मानें तो इस समय सुरज़ व चाँद की रोशनी पृथ्वी पर कम पड़ती है, पानी की मात्रा ज्यादा हो जाती है, जिसके कारण बहुत से जीव-जंतु पैदा हो जाते हैं, जो कि बिमारियों को पैदा कर देती हैं। इन चार माह के लिए साधु-संत व तपस्वी किसी स्थान में रहकर तप व साधना करते हैं।

पुराणों का अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को कमल के फूलों से पूजा जाता है, ऐसा करने से तीनों लोकों के देवताओं को भी पूजन किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव शंकर का श्रावन मास आता है जिसमें उनका पूजन किया जाता है। इसके पश्चात गणेश चतुर्थी में गौरीपुत्र भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। फिर माँ दुर्गा के आराधना के नौ दिन आ जाते हैं।

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