Eco-Friendly Indian Wedding

Eco-Friendly Indian Wedding- हम भारतीय लोगों के लिए शादी-ब्याह स्टेटस सिंबल बन चूका है। इस स्टेटस सिंबल में आपका खाना-पीना, डीजे, डेकोरेशन, गेस्ट्स, वेडिंग कार्ड्स, रिटर्न गिफ्ट्स, ब्राइड एंड ग्रूम की ड्रेस, सब चीज़ें नापी जाती है। इस स्टेटस सिंबल को संभालने के लिए लोग अपना खून पसीने की कमाई सारी लगा देते हैं। लड़की वाले अपनी प्रिंसेज़ के डी-डे के लिए करोड़ों खर्च कर देते हैं। वहीं, लड़के वाले अपने राजकुमार के लिए लगज़री गाड़ी और बेहतरीन गिफ्ट्स के इंतज़ार में बैठे रहते हैं।

लड़के वाले सिर्फ यही कहते हैं कि बारात की खातिरदारी अच्छी होनी चाहिए। इतनी सी बात और करोड़ों खर्च हो जाते हैं। इस बात को तो कोई बदल नहीं सकता, कि हर कोई यह चाहता है कि उसकी शादी के बारे में पूरी दुनिया को पता चले। इसके लिए वह अलग-अलग प्लान्स बनाते हैं। लेकिन, आज के समय में युवा इसी स्टेटस सिंबल को संभालने के लिए इको-फ्रेंडली बन रहे हैं।

हाल ही में भोपाल के एक परिवार ने अपने गेस्ट्स को वेडिंग इन्विटेशन के लिए कार्ड की जगह एक पोटेड प्लांट दे रहे हैं। भोपाल के बिजनेसमैन प्रांशु कंकने और उनके भाई प्रतीक ने इको-फ्रेंडली वेडिंग का ही ख्याल आया और उन दोनों को इसका एक मौका भी मिल गया। उन्होंने, प्रांशु की शादी के लिए वेडिंग कार्ड्स की जगह पोटेड प्लांट्स गिफ़्ट में दिए। उनका यह प्लान सभी लोगों को बहुत पसंद आया।

Eco-Friendly Indian Wedding- इससे पहले, मुंबई के एक कपल ने भी अपनी शादी के लिए अनोखा इको-फ्रेंडली प्लान बनाया। मुंबई के इस कपल ने रीसाइकल्ड प्रोडक्ट्स को यूज़ किया है। बॉलीवुड की बिग फैट वेडिंग तो फेमस होती ही है, लेकिन यह वेडिंग भी फेमस हो गयी।

इस समय ईको-फ्रेंडली शादी बड़ी फेमस है। अब, इंडिया में बिग फैट वेडिंग को ईको-फ्रेंडली वेडिंग बना दिया गया है।

फूलों की जगह फैब्रिक के कपड़ों को सजावट के रूप में लिया जाता है। अब युवाओं के मन में है ‘Say No to Wastage’. आज कल के युवा कपल अब अपनी शादी में किसी भी तरह ‘बर्बादी’ नहीं चाहते। इन्वाइट्स से लेकर शादी में होने वाली डेकोरेशन, अपने में यूनिक हो लेकिन कोई भी चीज़ वेस्ट न हो।

अब डेकोरेशन के लिए फैब्रिक के फूल इस्तेमाल किये जाते हैं। फूलों की जगह फैब्रिक के कपड़ों को सजावट के रूप में लिया जाता है।

शादियों में अब जयमाला भी आर्गेनिक और रीसाइकल्ड फ्लावर्स से बनाई जाती है।

मेहमानों के लिए बनाई गई बैठने की व्यवस्था का भी ख़ास ध्यान रखा जाता है। अब फ्रूट-बेस्ड सेंटरपीस को यूज़ किया जाता है।

बचा हुआ या व्यर्थ खाना, किसी जरूरतमंद को दे दिया जाता है या फिर किसी जानवर को दे दिया जाता है।

डिस्पोजेबल कटलरी की जगह अब स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है।

Eco-Friendly Indian Wedding- शादी के कार्ड में लोग लाखों खर्च कर देते हैं। असल में, हमारे इंडियन पेरेंट्स की यह सोच होती है कि कार्ड जितना महंगा और सुन्दर होगा, लोग उतना ही शादी को आलिशान मानेंगे। लेकिन, अब शादी के कार्ड्स में कोई ज़्यादा पैसा खर्च नहीं करता। इंटरनेट के ज़माने में अब लोग अपने रिलेटिव्स और फ्रेंड्स को सोशल मीडिया पर ही बुलावा भेज देते हैं। ऑनलाइन ही कोई बढ़िया कार्ड बना दिया जाता है और उसे सब जगह शेयर कर दिया जाता है।

मेहमानों को रिटर्न गिफ्ट्स की जगह कोई न कोई जरूरत का सामान दे दिया जाता है।

अब लोग शादी में होने वाली आतिशबाज़ी को भी पसंद नहीं करते। उनका मानना है कि इससे पॉल्यूशन होता है। सही है न। लोग इस बात को जानते भी हैं और समझते भी हैं। लोग शादी में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करना चाहते।

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अब युथ अपनी वेडिंग को यूनिक के साथ-साथ इको-फ्रेंडली वेडिंग चाहते हैं।

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