ऑटोमोबाइल सेक्टर में घटकी मानगो को लेकर अब कई कंपनी डीजल कारें न बनाने का फैसला किया है। कंपनी के इस निर्णय के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में हाहाकार मच गया है। इसके साथ ही चर्चा यह होने लगा है की क्या डीजल कारों की वजूद के वजूद सिमट जाएगी। यह मामला तब सामने आया हैं, जब भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल नोर्म्स में कुछ बदलाव करने जा रही है। तो चलिए जानते है आखिर पूरा मामला क्या है…

डीजल कारों के वजूद को लेकर बहस

बता दे कि बीते अप्रैल महीने से ऑटोमोबाइल सेक्टर में कुछ नॉर्म में भारी बदलाव देखने को मिले है। शायद यही वजह है कि कई कंपनी डीजल कारें न बनाने का फैसला किया है। इसके साथ ही ऑटो कंपनियां अपने इंजन को BS6 एमिशन नॉर्म्स अपग्रेड करने में लगी हुई हैं। बताया जाता है की अगर कोई कंपनी पेट्रोल इंजन को अपग्रेड करती है, तो कम खर्च लगती है, जबकि उसी डीजल इंजन को अपग्रेड करने में ज्यादा खर्चा आता है। इसी को लेकर ज्यादातर कंपनी इस इंजन वाली कारें बंद करने जा रही हैं।

मारुति सुजुकी

दुनिया की सबसे बेहतरीन कार डिज़ाइन करने वाली कंपनी मारुति सुजुकी उनमे से एक है। इन दिनों मारुति सुजुकी सुर्खियो में है। बताया जा रहा है की साल 2020 से यह कंपनी अपने डीजल कारें को हमेशा के लिए बंद करने जा रही है। इस एलन के बाद डीजल कारों के वजूद को लेकर बहस तेज हो गई है। अगर ऐसा करती है तो कंपनी का नंबर वन का टाइटल भी खतरे में पड़ सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा की इसका कितना असर ग्राहकों के उपर पड़ता है। हालंकि अपने एलन में कंपनी से साफ़ कर दिया है, अगर डिमांड रही तो, कंपनी आने वाले दिनों में इस पर विचार करेगी।

स्कोडा

मारुति सुजुकी के बाद स्कोडा ने भी अपने एलन में कहा कि आने वाले महीने में डीजल वेरियंट बंद कर देगी। मतलब साफ़ है की इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा, जो डीजल कार के शोकिन है। डीजल कार की कीमत भी थोड़ी सस्ती होती थी। कंपनी की और से कहा गया है कि डीजल इंजन को BS4 से BS6 में अपग्रेड करने से लागत बढ़ जाती है जोकि मुनाफे को सौदा नहीं होगा।

इन वजहों से खत्म हो जाएगा डीजल कारों का दौरा-

  • दरअसल बीतें कुछ सालों में डीजल कारों की बिक्री घटी है।
  • 2012 में जहां कुल कारों का 47 फीसदी हिस्सा डीजल कारों का होता था वहीं 2018 में ये घटकर मात्र 23 फीसदी ही रह गया है।
  • 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल कारें चलाने पर सरकार रोक लगा रही है।
  • डीजल में पाए जाने वाले pm 2.5 की मौजूदगी की वजह से पूरी दुनिया डीजल को डर्टी फ्यूल मान चुकी है।

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