Indian Economy Slowdown- देश की अर्थव्यवस्था अब कहाँ जा पहुंची है, आपको पता चल ही गया होगा। आम नागरिक के लिए हर चीज़ के दाम आसमान छू रहे हैं। चाहे वह प्याज़ हो या रहने के लिए घर, सभी चीज़ें महँगी हो चुकी हैं।

पिछले हफ्ते, यानी नवंबर माह के आखिरी दिनों में भारत सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था के नए आंकड़े जारी किये। अब देश की जीडीपी 4.5 फ़ीसदी पर पहुँच चुकी है। यह आंकड़े पिछले छह सालों में सबसे निचले स्तर पर दिख रही है। पिछली तिमाही में भारत की जीडीपी 5 फ़ीसदी रही।

इसी साल, जुलाई में जब बजट पेश हुआ था तो सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को सही करने के लिए कई कदम उठाए थे। लेकिन, अब इन आकड़ों को देख कर तो यही लगता है कि सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम सफल नहीं हो रहे हैं।

साल 2013 की जनवरी में मार्च के करीब जीडीपी दर 4.3% पहुंच चुकी थी। इसके साथ इंडस्ट्री ग्रोथ भी 6.7 परसेंट से भी आधी हो गई है। कृषि क्षेत्र (Agricultural Sector) के भी ख़स्ता हालत है, पहले यह 4.9 परसेंट से गिरकर 2.1 परसेंट रह गई है। सर्विसेज दर भी 7.3% से गिरकर 6.8 परसेंट हो गई।

आंकड़ों को पढ़कर यह पता चला है कि अब देश का आर्थिक विकास (Economic Development) दर 5% ही रह गई है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष (Financial Year) की तिमाही के दौरान विकास दर (Growth Rate) 8 परसेंट थी।

देश सुस्ती की तरफ बढ़ रहा है –

अब जिस तरह देश की अर्थव्यवस्था जिस तरह से सुस्ती से आगे बढ़ी है, तो अब लोगों के सामने काफी प्रश्न बढ़ रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न जो सभी लोगों को खा रहा है वह है कि इस तरह की जीडीपी की हालत को देख कर हमें यह मान लेना चाहिए कि हम आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं? सचमुच, यह प्रश्न परेशान करने लायक है।

Indian Economy Slowdown

देश की अर्थव्यवस्था के बनते ऐसे हालात देख, अब इन प्रश्नों का जवाब, भारत सरकार और देश का वित्त मंत्रालय नहीं दे रहा है। भारतीय सरकार और भारत के वित्त मंत्रालय की तरफ उंगलियां उठ रही हैं।

प्याज के दाम फिर रुला रहे हैं मिडल क्लास वालों को

हाल ही में, केंद्र में अपनी सरकार बनाने वाली भारतीय के ही एक सांसद ने देश की वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण के लिए यह कह दिया कि उन्हें इकोनॉमिक्स नहीं आती। यह बात कहने वाले हैं भारतीय जनता पार्टी के सांसद, एमपी सुब्रमण्यम ने। सुब्रमण्यम ने देश की गिर रही आर्थिक व्यवस्था के लिए चिंता जाहिर करते हुए कहा, कि देश की अर्थव्यवस्था असल में और भी गिरी हुई है। जीडीपी 4.5 नहीं 1.5 है।

जब देश में साल 2016 में नोटबंदी की गई थी तो देश के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यह बात कही थी कि ऐसा करने से देश की जीडीपी दो परसेंट नीचे गिर जाएगी।

यदि बेरोजगारी इस कदर बढ़ती रही तो, 2030 तक बद्द्तर होगी स्थिति

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