वाॅकहार्ट समूह की तरफ से कैलाश सत्यार्थी को वाॅकहार्ट लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॅार्ड से नवाजा गया। राष्ट्रीय सिनेमा संग्रहालय के एक समारोह में कैलाश सत्यार्थी अपनी पत्नि सुमेधा कैलाश के साथ पहुँचे। यहाँ उनकी डाक्यूमेंट्री फिल्म द प्राइस आफॅ फ्री की स्क्रीनिंग भी हुई।

इससे पहले सत्यार्थी को भारत व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के सभी अधिकारों के लिए किए गए काम की वजह से 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।

डाक्यूमेंट्री फिल्म में सत्यार्थी ने कहा, ‘कई हमलों और बर्बरता के बावजूद हर बच्चे को मुक्त कराने की अपनी प्रतिबद्धता से न ही हम कभी पीछे हटे और न ही कभी समझौता किया’। यह फिल्म करुणा, आशा और साहस को प्रदर्शित करती है। साथ ही बाल-श्रम जैसे मुद्दों पर लोगों को खुल कर बात करनी चाहिए। यह फिल्म बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के लिए भी प्रेरित करेगी।

मौके पर वाॅकहार्ट समूह के अध्यक्ष और संस्थापक डाॅ. हबिल खोराकीवाला ने कैसाश सत्यार्थी को वाॅकहार्ट लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।

कौन हैं कैलाश सत्यार्थी

बचपन बचाओ आंदोलन चलाने वाले कैलाश सत्यार्थी, 11 जनवरी 1954 को मध्य प्रदेश के विदिशा में जन्म हुआ। उन्हें बाल क्षम औऱ बच्चों की शिक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है। 26 साल की उम्र में ही इलेक्ट्रानिक इंजीनियर रहे कैलाश सत्यार्थी ने करियर छोड़ बच्चों के लिए काम करना शुरु कर दिया था।

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