आने वाले कुछ पलों में दुनिया भर में दशहरे का महा पर्व बनाया जायेगा जिसमे रावण के पुतलों को फूंका जायेगा | फिर धार्मिक बाबाओं के विचार लिए जायेंगे जिसमे वे बोलेंगे रावण का दहन बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है | पर क्या वास्तव में वह रावण आज के रावण से भी बुरा था | कलयुग के रावण से तात्पर्य समाज में रह रहे ढोंगी बाबाओं , एक साल के बच्चे के साथ दरिंदगी को अंजाम देने वाले लोग व पराई लड़की को शराब पीकर छेड़ने वाले युवा से है |

इतिहास के रावण की तुलना भी इनसे नहीं की जा सकती |

‘लंकेश’ रावण के गुणों को देखा जाये तो वह महाबली होने के साथ साथ राजनीतिज्ञ ,सेनापति, वेदो के ज्ञान से भरपूर, सोने की लंका का मालिक व भक्ति का प्रतीक है | साथ ही एक और गुण जो देखने को मिलता है वह सदाचारी था | एक साल तक माँ सीता उसके कैद में रही पर उसने उसके बावजूद भी कभी हाथ तक नहीं लगाया | यहां तक की वह राम का वेश धारण कर माँ के साथ कुछ भी कर सकता था पर नहीं किया | स्त्री के प्रति सम्मान देखकर कर लगता है की अगर वह आज भी ज़िंदा होता तो महिलाओं को डरने की जरूरत नहीं होती |

दूसरी और कलयुग के रावणों की बात करें तों बाबा जो थोड़ा सा ज्ञान लेकर या तंत्र मंत्र विद्या सिखकर महिलाओं व छोटी छोटी बच्चियों को अपनी हब्स का शिकार बनाते है |लोगो की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते है | हाल ही में देखा गया था खुद को भगवान का अंश बताने वाला आरोपी राम रहीम जिसके ऊपर उसकी ही महिला अनुयायिओं ने बल्तकार जैसे घिनौना आरोप लगाया था |

हर रोज़ एक रेप का नया मामला सामने आता है कुछ महीनो पहले ही 13,14 साल की बच्ची को अपना मामा बताने वाले ने ही बच्ची का रेप कर उसकी हत्या कर दी |  ऐसा हर रोज़ एक नया काण्ड सामने आता है जो रोंगटे खड़े कर देता है | फिर भी वह ज़िंदा है क्या इन जैसो के लिए सिर्फ जेल तक की ही सलाखें बनी है |

आज लोग किसी की आत्मा को शांति देने के लिए या न्याय दिलवाने के लिए सड़को पर मोमबत्ती जलाकर इन्साफ की मांग करते है | पर खबरों में पढ़कर व सुनकर की पुलिस ने रिमांड पर लिया बल्तकारी बाबा, मामा आदि सुनने के बाद अपने घरो में शांत बैठ जाते है |

असलियत में तो कलयुग के इन रावणो को जलाकर ख़ाक करना चाहिए | जिस दिन ऐसा होगा उस दिन दशहरे पर वास्तव में बुराई पर अच्छाई की जीत होगी |

 

 

 

 

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