कर्नाटक में चल रही सियासी जंग कब शांत होगी यह कोई नहीं जानता। वहाँ पर स्थिति यह है कि कोई भी सरकार वहाँ काम नहीं कर रही है। कर्नाटक की विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट के बाद कुमारस्वामी की सरकार नहीं टिक पाई। अब कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए सभी की नजरें भाजपा की ओर हैं। लेकिन ऐसा देखने में लग रहा है कि वहाँ भाजपा अपनी सरकार बनाने में देरी कर रही है। सुनने में आया था कि कर्नाटक में बीजेपी के नेता बीएस येद्दयुरप्पा कल राज्यपाल वजूभाई से मिलकर सरकार बनाने को लेकर बात करते। लेकिन उन्होंने अपने कार्यक्रम में बदलाव कर दिए और वो राज्यपाल से नहीं मिले।

हालांकि कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने 15 बागी विधायकों के इस्तीफे पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। इसका अर्थ है कि जब तक उन 15 बागी विधायकों के इस्तीफे पर फैसला नहीं लिया जाता, तब तक कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लग सकता है।

कर्नाटक के बीजेपी प्रवक्ता जी मधुसूदन ने कहा कि अगर स्पीकर को बागी विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार या अस्वीकार करने में अधिक समय लगेगा तो राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं, क्योंकि ऐसे में स्थिति में सत्ता में दावा नहीं किया जा सकता।

मधुसूदन का कहना था कि जब तक बागी विधायकों पर फैसला नहीं हो जाता तब तक विधानसभा को निलंबित किया जा सकता है। यदि बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए या फिर उन्हें अयोग्य करार कर दिया जाता है, तब इन हालातों में 6 महीनों के भीतर 15 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव कराने होंगे।

कांग्रेस के बागी विधायकों की याचिका सुप्रीम कोर्ट में पैंडिग है। अब बीजेपी इस सोच में बैठी है कि पहले स्पीकर और सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना दें तो इसके आगे वो अपना प्लान बनाएं। सुत्रों के मुताबिक गत शुक्रवार तक विधानसभा स्पीकर 15 बागी विधायकों पर कोई न कोई फैसला कर सकते हैं।

17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष कानून के आधार पर ही बागी विधायकों के दिए इस्तीफों पर फैसला ले सकते हैं। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही से मुक्त कर दिया है।

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