Kohima War Cemetery: 15 अगस्त 1947 आज़ादी का यह साल इतिहास के पन्नों में कुछ इस कदर दर्ज़ हैं, जिसका ज़िक्र होते ही एक अलग सी खुशी मिलती हैं, गर्व महसूस होता हैं। वैसे तो फिल्मों में देखा हैं, किताबों में पढ़ा हैं, और अपने बड़े बुजुर्गों से सुना हैं की यह आज़ादी पाना इतना आसान ना था। बहुत अपनों को खोया हैं, निर्दोषों का खून बहा है, कई घर उजड़े, तो कई बिखरे तब जा कर हमें यह सुकून के पल नसीब हुए।

लेकिन क्या अगर अब आपको पता चले की इस आज़ाद भारत में आज भी एक ऐसी जगह है, जहाँ पर ब्रिटिश सरकार की इज़ाज़त के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलाया जा सकता…..तो इस पर आपका का रिएक्शन कैसा होगा?

जी हां, भारत में आज भी एक ऐसी जगह है….. जहां पर आपको जाने के लिए, फ़ोटोग्राफ़ी करने के लिए या किसी भी कार्य के लिए यहाँ तक की एक पौधा लगाने की भी अनुमति नहीं हैं। क्योंकि यहाँ पर कुछ भी करने के लिए आपको सरकार से इज़ाज़त लेनी होगी वो भी इंडियन नहीं बल्कि ब्रिटिश सरकार से।

क्योंकि इस जगह पर खुद भारत सरकार भी अपनी मर्ज़ी नहीं चला सकता। अर्थात भारतीय सरजमीं पर होने के बावजूद इस जगह पर भारतीय नहीं बल्कि ब्रिटिश राज चलता हैं। तो इस जगह पर पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने के लिए आपको पहले ब्रिटिश सरकार के पास आवेदन करना होगा। मंजूरी मिली तो सही वरना इंतज़ार करें…

जानें कौन सी हैं वो जगह?

बता दें, ब्रिटिश सरकार की हुकूमत वाली यह जगह नागालैंड की राजधानी कोहिमा में है। जी हाँ, कोहिमा में  Kohima War Cemetery नाम से जाने-जाने वाले इस जगह पर ब्रिटिश सरकार राज करती है।

Kohima War Cemetery
Kohima War Cemetery

क्या हैं इस जगह की खासियत?

बात सन 1944 की हैं, यह वो वक़्त था जब ‘द्वितीय विश्व युद्ध’ से पूरी दुनिया जूझ रही थी। उस दौरान जापान की आर्मी ने ब्रिटिश आर्मी पर हमला कर दिया। यह हमला जापान की सेना ने पहले बर्मा फिर मिज़ोरम होते हुए कोहिमा व इम्फ़ाल पर किया। जापानियों का इरादा ‘गैरीसन हिल’ पर कब्ज़े करने का थी, हालांकि उनका यह इरादा पूरा ना हो सका क्योंकि ब्रिटिश सैनिकों ने उन्हें वहां से खदेड़ भगाया।

Kohima War Cemetery
Kohima War Cemetery

बहराहल इस लड़ाई के दौरान दोनों तरफ़ से ही भयनाक तरह से गोलाबारी हुई। इस गोलाबारी में 1420 सैनिक शहीद हो गए। जिसमें 1082 ब्रिटिश, 330 भारतीय, 5 कनाडाई और 3 ऑस्ट्रेलियाई सैनिक शामिल थे। हमले में मारे गये सभी सैनिकों को ‘गैरीसन हिल’ पर दफ़ना दिया गया। साथ ही उनकी याद में समाधियों का निर्माण भी हुआ। तब से इन सभी कब्रगाहों पर ब्रिटेन सरकार का नियंत्रण है।

सबसे बड़ी लड़ाई: ‘बैटल ऑफ़ कोहिमा-इंफाल’

इतना ही नहीं साल 2013 में ब्रिटिश नेशनल म्यूज़ियम ने सन 1944 में हुई लड़ाई बैटल ऑफ़ कोहिमा-इंफाल को ब्रिटेन की सबसे बड़ी लडाई का दर्ज़ा दिया।

Kohima War Cemetery

कौन करता हैं इस जगह की देखभाल ?

अब सवाल यह था की इन सभी कब्रगाहों की देखरेख आखिर कौन करता है? तो बता दें, इस जगह की देखभाल ‘कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन’ द्वारा की जाती है। गौरतलब हैं, आज कोहिमा आने वाला हर पर्यटक इस जगह को देखने ज़रूर जाता है, लेकिन अगर यहां कोई व्यक्ति अपने मोबाइल से फ़ोटो भी लेना चाहता है तो उसकी इजाज़त भी ब्रिटिश सरकार से लेनी होती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल ही इस कब्रगाह के नज़दीक वाली सड़क को चौड़ी करने के लिए इंग्लैंड सरकार से परमिशन मांगी गई थी, हालांकि उन्हें यह परमिशन नहीं मिली।

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