निष्ठां डुडेजा जो है हरियाणा के पानीपत उन्होंने मिस डेफ एशिया 2018 का ख़िताब कर लिया है अपने नाम , और अपना ही नहीं बल्कि अपने देश का भी नाम रोशन कर दिया है चेक गणराज्य में 18 वी मिस डेफ वर्ल्ड 2018 प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमे 45 देशो के प्रतियोगियों ने भाग लिया और उसमे मिस निष्ठां डुडेजा ने सबको हराते हुए मिस डेफ एशिया 2018 का ख़िताब अपने नाम किया है निष्ठां ने अपनी काबिलियत से ये ख़िताब को अपने नाम किया है | निष्ठां ने अपनी काबिलियत से इस ख़िताब को जीता है और वो इसको पाकर बहुत खुश है |

निष्ठां बचपन से सुनने में बचपन से ही अक्षम है और वह इस प्रतिषिठित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया ताकि वो अपनी योग्यता सबको दिखा सके वो इस प्रतियोगिता को जितने वाली पहली भारतीय महिला बनी है | इस प्रतियोगिता में देश के कोने कोने से लोग आये थे इस प्रतियोगिता में चीन, थाईलैंड, ताइवान , इजरायल, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका से सुन्दर सुन्दर लडकिय आई थी लेकिन निष्ठां ने सबको पछाड़ दिया और इस ख़िताब को जीत लिया |

अपनी इस जीत के बाद निष्ठां ने फेसबुक पेज पर लिखा , ‘ वो भी क्या पल था , यह भावुक करने वाला था, यह ऐसा कुछ है जिसे मैं जिंदगी भर संभाल के रखूंगी और पहली बार इस प्रतियोगिता में किसी भारत वाले ने क्राउन जीता है और मुझे ख़ुशी है की मैंने ये ख़िताब भारत के लिए जीता है |

भारत लौटने के बाद निष्ठां ने कहा की मैं अपने पेरेंट्स को इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहती हु जो हमेशा मेरी मदद के लिए मौजद रहे है अब में वंचित लोगो की मदद करना चाहती हु चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े मेरा मनांना है की ऐसे लोगो को दया की नहीं बल्कि मौको की जरुरत होती है जिससे वो अपने आप को साबित कर सके |

निष्ठा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के वेकटेशवरा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और अभी वो मुंबई से एमए कर रही है स्टडीज में ही नही बल्कि खेल में भी अच्छी खिलाडी है वो टेनिस बहुत अच्छा खेलती है वो डेफल्मपिक्स , वर्ल्ड डेफ टेनिस चैंपियनशिप में भाग ले चुकी है निष्ठां सिर्फ 23 साल का है उन्होंने कहा की उन्होंने ये ख़िताब अपनी योग्यता के कारण जीता है और वो अपनी कामयाबी का सारा श्रेय अपनी माँ को देना चाहती है |

निष्ठां दिल्ली के चाणक्यपुरी में रहती है और उनके पिता वेड प्रकाश डुडेजा इंजिनियर है वो उत्तर प्रदेश में काम करते है इस तरह निष्ठां ने अपनी लगन और मेहनत से ये साबित कर दिया है की अगर मन में कुछ भी करने का जज्बा हो तो कोई कुछ भी कर सकता है |

निष्ठां के पिता ने बताया की निष्ठा जनम से ही सुन नहीं पाती थी वो कहते है की निष्ठा जब ३ साल की थी तब हमे पता चला की निष्ठा सुन नहीं पाती है तबसे हमने निष्ठा को स्पीच थेरेपी देना शुरू कर दिया |

निष्ठां बताती है की मैंने इस प्रतियोगिता के लिए बहुत समय से तैयार्री करी थी जिसमे सबसे ज्यादा हिम्मत मेरी माँ ने मेरी बढाई है इस प्रतियोगिता के लिए मैंने कई सारी चीज़े सीखी जिसमे डांस करना , मेकअप करना और कैटवाक करना मुख्य है |

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