President Rule in Maharashtra:- महाराष्ट्र में चुनावी खेल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। भले ही, महाराष्ट्र में होने वाले इलेक्शन को भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन वाली सरकार बना कर जीत लिया हो। लेकिन, मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलनी चाहिए, आज भी दोनों पार्टियां इसी बात से परेशान हैं।

मंगलवार को, राज्य में राष्ट्रपति शासन के लिए राज्यपाल की सिफारिश को कैबिनेट सरकार ने मंज़ूरी दे दी है। अब, देश के राष्ट्रपति के पास इस सिफारिश को आगे भेजा जाएगा। वहीं, राज्यपाल के पास सिफारिश भेजने के खिलाफ शिवसेना ने भी खेल खेला है। शिवसेना ने भी इस बात से नाराज़ हो कर सुप्रीम कोर्ट का गेट खटखटाया है।

President Rule in Maharashtra

President Rule in Maharashtra:- शिवसेना ने यह आरोप लगाया है कि यह सब कुछ भाजपा के इशारे पर हो रहा है। शिवसेना का कहना है, राज्यपाल ने पार्टी को सिर्फ 24 घंटे का समय दिया है। कहा जा रहा है, प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से पहले हुई कैबिनेट हुई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री के सामने महाराष्ट्र का मुद्दा उठाया गया। फिर, राज्यपाल की सिफारिश को मान लिया गया।

पिछली सरकार का कार्यकाल हुआ ख़त्म, नई सरकार के इंतज़ार में बैठी है जनता

राज्य में पिछली सरकार का कार्यकाल 9 नवम्बर को ख़त्म हुआ था। इस कार्यकाल के बाद, राज्य की जनता द्वारा चुकी गई सरकार को मुख्यमंत्री की गद्दी दी जानी थी। लेकिन यहाँ तो उलटी गंगा बह रही है। कोई भी राजनितिक पार्टी या गठबंधन की पार्टी ने राज्य में अपनी सरकार बनाने के लिए बहुमत के साथ अभी तक कोई दावा पेश नहीं किया है।

President Rule in Maharashtra:- इसी बीच, राज्यपाल सभी पार्टियों के नेताओं से मिले। पहले ही, भाजपा ने सरकार बनाने के नाम पर अपनी समर्थता दिखाई। इसके बाद, शिवसेना-कांग्रेस एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार हो तो गई लेकिन बहुमत के साथ दावा पेश नहीं कर पाई।

चुनावी परिणाम आने के बाद बदली थी स्थिति

राज्य में चुनाव के परिणाम आने के बाद, शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की मांग करनी शुरू कर दी थी। कहा जा रहा है, चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच यह फैसला हुआ था कि दोनों पार्टियों के महत्वपूर्ण व्यक्ति को ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री का पद देंगे। परंतु, परिणाम के बाद भाजपा ने किया हुआ वादा पूरा नहीं किया।

GENERAL ELECTIONS 2019 – महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार का लग रहा है पलड़ा भारी

President Rule in Maharashtra:- फिर, भाजपा की तरफ से यह बात बन तो जाती लेकिन इस बात पर भी पानी तब फिर गया जब भाजपा ने यह कह दिया था कि हम खुद से सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं हैं। केंद्र सरकार में शामिल हुए शिवसेना के एक मात्र मंत्री अरविन्द सावंत ने केंद्रीय मंत्री-मंडल से भी इस्तीफ़ा दे दिया था। इसके बाद, शिवसेना ने एनडीए से हटने की घोषणा कर दी थी। एनसीपी ने शिवसेना से संपर्क किया और यह इशारा मिला कि उसकी तरफ से समर्थन मिल सकता है।

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