Saudi Oil Attack:- 14 सितम्बर को अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के दो बड़े ठिकानों पर जोरदार ड्रोन हमले हुए। जिसके बाद कंपनी ने वहां उत्पादन करना बंद कर दिया। और इसका असर यह पड़ा की सऊदी अरब की इस सबसे बड़ी तेल एवं गैस कंपनी के उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। वहां के ऊर्जा मंत्री का कहना है कि इस हमले के कारण कच्चे तेल का उत्पादन प्रतिदिन 57 लाख बैरल तक घट गया है। विश्लेषकों की मानें तो इसकी वजह से दुनियाभर में तेल के दाम पर असर देखने को मिलेगा। सऊदी अरब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही जरुरी है।

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि सऊदी अरब के प्लांट में तेल आपूर्ति को नार्मल होने में वक़्त लग सकता है। इस हमले के कारण ग्लोबल सप्लाई पर 5% असर पड़ा है। हो सकता है की अगले हफ्ते में ही कच्चे तेल की कीमतों में 15-20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ जाए। Saudi Oil Attack का प्रभाव सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर दिखाई देगा। इससे हमले के होने से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे वो देश जो सऊदी अरब से सीधे तेल आयात करते हैं। सूत्रों के मुताबिक़, Saudi Oil Attack के कारण यदि उत्पादन ज़्यादा समय बंद रहा तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

Saudi Oil Attack - भारत के साथ सऊदी अरब की अरामको के साथ डील भी है और अरामको भारतीय कंपनी रिलायंस के बिजनेस में भी 20% तक का हिस्सा रखती है।

आपको बता दें भारत कच्चे तेल के मामले में विश्व का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है। और सऊदी अरब ही भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति और कुकिंग गैस का स्त्रोत है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में Saudi Oil Attack के बाद से बढ़ने वाली कच्चे तेल की कीमत का असर भारत देश को भी झेलना पड़ेगा। यह बुरा असर आयत बिल और राजकोषीय घाटे पर पद सकता है।

फाइनेंसियल ईयर 2018-19 में भारत ने कच्चे तेल के लिए 111.9 अरब डॉलर खर्च किए हैं। और अब इस Saudi Oil Attack कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत में आर्थिक सुस्ती, वैश्विक मंदी और ट्रेड वॉर से घरेलू बाज़ार में ग्राहकों को परेशानी झेलनी हो सकती है। वैसे, भारत के लिए सऊदी अरब में हुआ Saudi Oil Attack किसी चिंता के विषय से काम नहीं है। भारत के साथ सऊदी अरब की अरामको के साथ डील भी है और अरामको भारतीय कंपनी रिलायंस के बिजनेस में भी 20% तक का हिस्सा रखती है।

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