STORY 1 :-इंडिया की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने बुधवार को शुरू हुए चाइना ओपन के पहले दौरे में जीत हासिल की है। इस शुरूआती खेल में उन्होंने ली श्वरे को 21-18, 21-12 के गेम के साथ टूर्नामेंट से सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके साथ ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीत हासिल करने वाली पीवी सिंधु ने चाइना ओपन के पहले दौर को जीत कर अपने लिए जगह बना ली है। यह पहला मैच 34 मिनट तक चला। इस गेम की शुरुआत में ही सिंधु ने आक्रामक खेल 2-0 की शुरुआत से लीड ली। ब्रेक टाइम तक सिंधु के खिलाफ स्कोर 9-10 थे। लेकिन सिंधु ने लगातार अंक हासिल करते हुए 21-18 से इस गेम पर अपना नाम लिखा।

दिग्विजय सिंह के खिलाफ आई मानहानि की शिकायत

STORY 2 :- कांग्रेस पार्टी का जाना-माना चेहरा यानी की दिग्विजय सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि की एक शिकायत सामने आयी है। दिग्विजय सिंह द्वारा यह बयान दिया गया था कि भाजपा, बजरंग दल पाकिस्तान के आईएसआई से पैसा ले रहे हैं। अब इस मामले की सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
यही नहीं, कांग्रेस नेता ने एक और बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि आज भगवा पहन कर लोग दुष्कर्म कर रहे हैं, मंदिर जैसी पवित्र जगह पर भी महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं हो रही हैं। यह बात उन्होंने भोपाल में हुए एक संत समागम में कही थी।

हिंदी’ भाषा पर अमित शाह के दिए बयान पर चिदंबरम का जवाब

STORY 3 :- अभी हाल ही में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 'हिंदी' को लेकर एक बयान दिया था। और यह बयान अब एक मुद्दा बनने की ढाल पर है।

STORY 3 :- अभी हाल ही में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ‘हिंदी’ को लेकर एक बयान दिया था। और यह बयान अब एक मुद्दा बनने की ढाल पर है। तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने इस पर ट्वीट करके कहा – हिंदी भाषा देश के लोगों को एकजुट कर सकती है, यह बेहद खतरनाक है। इसके साथ उन्होंने कहा कि मैंने परिवार को अपनी और से ट्वीट करने के लिए कहा है, यह एक खतरनाक विचार है कि अकेले हिंदी इस देश के लोगों को एकजुट कर सकती है। तमिल और बाकी भाषा बोलने वाले लोग कभी भी हिंदी को लागू नहीं होने देंगे। एक दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा कि हम सभी भाषाओं के विकास का समर्थन करते हैं, लेकिन हम इस विचार को कभी स्वीकार नहीं करेंगे कि अकेले हिंदी इस देश के लोगों को एकजुट कर सकती है। उन्होंने एक और ट्वीट किया, इसमें उन्होंने लिखा कि हम सभी भाषाओं के विकास का समर्थन करते हैं, परन्तु हम इस बात को कभी नहीं अपनाएंगे की एक मात्र हिंदी भाषा ही देश को एकजुट कर सकती है।

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