गुरूवार को देश ने अपना 73वा स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया। इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा की अब चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ होगा। यह पद तीनों सेनाओं के ऊपर एक प्रमुख पद होता है। कहा जा रहा है की भारत को इस पद की जरुरत करीब २० साल से थी। बारे।

पीएम मोदी ने ध्वजारोहण के बाद अपने भाषण में कहा कि, तेजी से बदलती तकनीक और वक़्त के साथ युद्ध के तरीके भी बदल रहे हैं। अब अगर कहीं युद्ध हुआ तो वो पहले से भी ज़्यादा भयावह होगा। इससे निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बिच में बेहतर तालमेल होना चाहिए।

बेहतर तालमेल बनाये रखने के लिए सीडीएस सिस्टम लागू किया जाएगा। पीएम ने कहा की सुरक्षा के मुद्दे पर जानकार इसकी मांग काफी समय से कर रहे थे। इस सिस्टम से तीनों सेनाओं का नेतृत्व सीडीए करेगा। इस व्यवस्था को इसीलिए लाया जा रहा है ताकि तीनों सेना एक साथ काम कर सकें। कोई भी सेना आपस में किसी से भी पीछे नहीं रहे।

इंडियन आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत, एयर चीफ मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ और नेवी चीफ एडमिरल सुनील लांबा

1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद से सुरक्षा के जानकार इस सिस्टम की मांग कर रहे थे। कारगिल युद्ध के बाद ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी कर रहे थे, ने भी सीडीएस सिस्टम की मांग करि थी। उस समय ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स ने कहा था की यदि इस तरह की कोई व्यवस्था कारगिल युद्ध के समय होती तो हमें नुक्सान कुछ कम् होता। और सेनाओं में तालमेल बना रहता। अब बीस साल बाद इसे लागू किया जा रहा है।

कहा जाता है की उस समय इस मामले को लेकर तीनों सेनाओं के बीच में सहमति नहीं थी। फिर बाद में तीनों सेना के लिए चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी बनाई तो गई थी लेकिन समिति के चेयरमैन के पास मूल शक्तियां नहीं थी। यह पद इतना प्रभावशाली नहीं था। बहरहाल, वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ इस कमेटी के चेयरमैन के पद पर हैं।

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